बेहतर दुनिया के लिए के लिए बेहतर शब्द चाहिए .शब्द पंखों की तरह हलके ,मुलायम, सुनहरे ,उर्जावान हों जो हमें दुनियाकी सैर करादें.जो नीले गगन से लेकर खुरदुरी जमीं पे भी लायें तो खुरदुरे पन का एहसास न हो .क्या हम गढ़ सकते हैं एसे शब्द?
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‘उन्होंने कहा"जीवित मिट्टी वह होती है जि सका हम बार-बार उपयोग कर सकें :शशिकांत मुंडी को श्रधांजलि : मीडियावाला.इन।टालस्टॉय का कला के लिए कहा गया यह कथन महत्वपूर्ण है ‘रंग, ध्वनी, शब्द, कार्य आदि के द्वारा भावों की वह अभिव्यक्ति जो श्रोता, दर्शक आैर पाठक के मन में वही भाव उत्पन्न कर दे कला है।’मेरे घर के ड्राइंग रूम में एक एसी ही ...
संकल्प
हम भी बुन लेते हैं संकल्पों के जाले, ठीक उस मकड़ी की तरह जो घर का सपना देखती उलझ जाती है ,स्वयं के बुने जालों में हमारे स्वप्नों के ये जाल महीन तारों से बुने होते है ,चटक रंगों ,रेशमी तारों के वावजूद ,जकडन की चिपचिपाहट फंस जाने की उकताहट से मुक्त होनेकी छात्पताहत में , हम एक जाले से निकलते हुए दूसरा जला बुनने लगते है जाल दर जाल बुनने और निकलने की उलछन में हम और उलझते जाते है अपने ही बुने मकड जालों में अपने ही मकड जालों में
बिल्कुल जी..गढ़ते चलिये. अनेक शुभकामनाएँ.
जवाब देंहटाएंसादर वन्दे!
जवाब देंहटाएंशब्द ऐसे हों जो निशब्द ना लगें, बाकी गढ़ने से तो भगवान गढ़ जाते हैं, फिर शब्द तो उसका दूसरा रूप ही होता है.
रत्नेश त्रिपाठी
swati ji ki anya kahaniya padhi thee. aaj achar.. padhkar unke shabd shilapankan se aur adhik prabhawit hua. swati ji aapko hardik badhai.niymit read karunga. ashok manwani,bhopal
जवाब देंहटाएंbehtar shabdo ka to khajana hai aapke paas tai ji.
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