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बच्चों को दीजिए गरिमामय बचपन

न्यू मार्केट हो या कोई और मार्केट, भोपाल हो या कनॉट प्लेस दिल्ली हर शहर के चौराहे पर अक्सर गाड़ी रूकने पर भिक्षा मांगने वाली कुछ युवा महिलाएं गाड़ी के कांच से झांकने लगती है। मन को कचोटने वाली बात यह नहीं है कि वे औरतें भीख मांग रही हैं क्योंकि वे राजस्थान की या आसपास की कुछ ऐसी जातियों की औरतें होती हैं जिनके लिए भिक्षा मांगना उनकी मजबूरी नहीं उनका पेशा है वे भिक्षा के साथ-साथ मौका लगते ही गाड़ी से आपका मोबाइल, लेपटाप, सामान गायब करने की कला भी जानती है। क्योंकि उनका पेशा चोरी है और भिक्षावृत्ति उसका माध्यम है। मन को जो कचोटती है वो बात बेहद मार्मिक है इन औरतों की गोद में एकदम छोटी उम्र का कुपोषित, अफीम चटाकर सुलाया हुआ मरियल पिल्ले जैसे पकड़ा हुआ हाथ मोड़कर पट्टी बंधा पैर पर नकली प्लास्टर चढ़ा बच्चा। हाथ में दूध की खाली बोतल पकड़े गर्दन लटकते बच्चों को सम्भालती ये औरतें गिड़गिड़ाती है ‘बच्चा’ लोगों में दया और सहानुभूति का कारण बनता है और भीख मिल जाती है। क्या ऐसा कोई कानून है जो भीक्षावृत्ति पर रोक लगाए? निश्चय ही कानून है जिसके अनुसार भिक्षावृत्ति कानूनी अपराध है पर हम सब इसके रोकने के लिए…