शब्दों के अक्षत
विचारों की एक नदी हम सब के अंतस में बहती है ,प्रवाह है कि थमने को तैयार नहीं ,और थमना भी नहीं चाहिये क्यूंकि जीवन चलने का नाम है अंतस का यही प्रवाह तो अभिव्यक्ति का उदगम है .थमने मत दी जिए बस थामे रहिये इस उदगम को विचारों का मंथन जाने कब कोई रत्न उगल दे .विचारों कि यह नदी जाने कितने झरनों के साथ मेरे अंतर्मन में भी प्रवाहमान है जब तक है तब तक लिखना भी रोजमर्रा में शुमार है .अभिव्यक्ति का आकाश भी अनंत है इस शीर्षक चित्र कि तरह रंग है तो उगते सूरज कि लालिमा पर शब्दों के अक्षत लगाते रहिये लगाते रहिये ---------संभावनाओं के असीम आकाश पर स्वागत है आपका

गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

एक पिता एक सौ schoolmasters से अधिक है." -- English Proverb - अंग्रेजी कहावत

वे हमेशा हर पल हमारे साथ है .विगत पांच वर्षों से उनकी आवाज नहीं सुनी उन्हें नहीं देखा .१६ जनवरी २००४ सूर्य उतरायण हुआ था ,कहते है स्वर्ग के द्वार सीधे खुले होते है ,वे तुरंत चले गए ,पता ही नहीं चला की एसे भी कोई जाता है पर सत्य को तो स्वीकारना ही होता है । बेटी का अपने पिता से रिश्ता कोई मृत्यु भी नहीं तोड़ सकती वे हैं यंही कहीं .हाँ देखे है मेने बरगद जेसे अपने बाबूजी
.


आज मेरे पिता का जन्म दिन है ,पिता का महत्व जीवन में सदा बना रहता है अभी तक कोई दिन एसा नहीं गया जब वो मुझे याद न आते हों .हर हालमें सकारात्मक बने रहने की प्रेरणा देने वाले मेरे पिता मेरे लिए एक आदर्श हैं .उनकी जिजीविषा को उनकी अदम्य विचार शीलता ,निर्मल पारदर्शिता ,दूसरों की मदद करते रहने की प्रवृति को मै सादर प्रणाम करती हूँ .मै परमपिता परमेश्वर को धन्यवाद् देती हूँ की उसने मुझे उनकी बेटीबनाया .मै हर जन्म मै unki ही बेटी बनना चाहूंगी .हैप्पी बर्थ दे पापा .

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