शब्दों के अक्षत
विचारों की एक नदी हम सब के अंतस में बहती है ,प्रवाह है कि थमने को तैयार नहीं ,और थमना भी नहीं चाहिये क्यूंकि जीवन चलने का नाम है अंतस का यही प्रवाह तो अभिव्यक्ति का उदगम है .थमने मत दी जिए बस थामे रहिये इस उदगम को विचारों का मंथन जाने कब कोई रत्न उगल दे .विचारों कि यह नदी जाने कितने झरनों के साथ मेरे अंतर्मन में भी प्रवाहमान है जब तक है तब तक लिखना भी रोजमर्रा में शुमार है .अभिव्यक्ति का आकाश भी अनंत है इस शीर्षक चित्र कि तरह रंग है तो उगते सूरज कि लालिमा पर शब्दों के अक्षत लगाते रहिये लगाते रहिये ---------संभावनाओं के असीम आकाश पर स्वागत है आपका

सोमवार, 3 मई 2010

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा


कल ही की बात है , अपने गांव गई थी , गांव कभी साढ़े बारह तालाबों से पहचाना जाता था ,उसी गांव मे पानी आज सबसे बड़ी समस्या हो गया है .सुन्दर शीतल कुएं ,बावडियों वाला राजा भोज का धार नगर टेंकरों से पानी लेता है .पानी अडोंसपड़ोंससे झगडे का कारणबन गया है .पानी की धार पर शायद धार नगर का नाम रहा हो ,आज पानी के धार के अवशेष भी मिट रहे है .तालाबों में कालोनी बस गई .पर कुओं ,बावड़ी को कालोनी काटने वालो से बचाना होगा ,क्या पता कल कोई बावड़ी को भी महल दुमहले में बदल दे ?कुओं को मल्टी का रूप देदे ?चलो हम सब मिल कर कुओं ,बावड़ी के जल स्त्रोंतो को खोले और साफ करदे ,अपने घर के बारिश के पानी को धरती में उतार दें । पानी को कितना उलिचेंगे ,?इस बार धरती में डाले पानी इसके लिए चलो अपने खेतमें इक पोखर बानाय्र .

4 टिप्‍पणियां:


  1. अगला विश्वयुद्ध पानी पर कब्ज़े को लेकर ही होगा ।
    पर आप अपने सँकल्प पर कायम रहें !

    उत्तर देंहटाएं
  2. पानी की कमी बेपानी लोगो के कारण है

    उत्तर देंहटाएं
  3. ांअपका संकल्प अच्छा है सभी अइसे संकल्प लें तो ये समस्या आयेगी ही नही। शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं