शब्दों के अक्षत
विचारों की एक नदी हम सब के अंतस में बहती है ,प्रवाह है कि थमने को तैयार नहीं ,और थमना भी नहीं चाहिये क्यूंकि जीवन चलने का नाम है अंतस का यही प्रवाह तो अभिव्यक्ति का उदगम है .थमने मत दी जिए बस थामे रहिये इस उदगम को विचारों का मंथन जाने कब कोई रत्न उगल दे .विचारों कि यह नदी जाने कितने झरनों के साथ मेरे अंतर्मन में भी प्रवाहमान है जब तक है तब तक लिखना भी रोजमर्रा में शुमार है .अभिव्यक्ति का आकाश भी अनंत है इस शीर्षक चित्र कि तरह रंग है तो उगते सूरज कि लालिमा पर शब्दों के अक्षत लगाते रहिये लगाते रहिये ---------संभावनाओं के असीम आकाश पर स्वागत है आपका

मंगलवार, 24 अगस्त 2010

प्रशासन को सख्त रवैया अपनाते हुए एस्मा लागु करदेना चाहिए
.जूनियर डोक्टर जब अभी ग्रामीण इलाके में नहीं जाना चाहते तो बाद में क्या जायेंगे .?डोक्टर की डीग्री में पहली शपत मानवता की सेवा होती हे .वो  ग्रामीण या शहरी नहीं होती .कल वो कहेंगे की उन्हें केवल महानगर में ही नोकरी करनी हे .राज्य शासन को चाहिए वो अत्यावश्यक सेवा प्रतिरक्षण अधिनियम  एस्मा लागु करे समाज और मानवता के लिए यह जरुरी हे .  डोक्टर का दायित्व  सेवा से हट कर कमाना होता जा रहा हे जो उनकीअसंवेदन शीलता दर्शाता हे

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