शब्दों के अक्षत
विचारों की एक नदी हम सब के अंतस में बहती है ,प्रवाह है कि थमने को तैयार नहीं ,और थमना भी नहीं चाहिये क्यूंकि जीवन चलने का नाम है अंतस का यही प्रवाह तो अभिव्यक्ति का उदगम है .थमने मत दी जिए बस थामे रहिये इस उदगम को विचारों का मंथन जाने कब कोई रत्न उगल दे .विचारों कि यह नदी जाने कितने झरनों के साथ मेरे अंतर्मन में भी प्रवाहमान है जब तक है तब तक लिखना भी रोजमर्रा में शुमार है .अभिव्यक्ति का आकाश भी अनंत है इस शीर्षक चित्र कि तरह रंग है तो उगते सूरज कि लालिमा पर शब्दों के अक्षत लगाते रहिये लगाते रहिये ---------संभावनाओं के असीम आकाश पर स्वागत है आपका

शुक्रवार, 27 अगस्त 2010

jiwan ke kuch mayane ese bhi


26 अगस्त को मदर टेरेसा का शताब्दी वर्ष था .वे १०० साल की होती अगर हमारे बीचहोती तो . दुनिया की एक महान  माँ   हजारों बच्चों की माँ होने के बावजूद .सच्चे मन से कितनो ने उन्हें याद किया ?मानवता  की सेवा में जीवन अर्पण करने वाली इस    माँ को मेरी श्रधान्जली .कल भूल गई थी आज एक दिया उनके नाम का प्रज्वलित किया .

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