शब्दों के अक्षत
विचारों की एक नदी हम सब के अंतस में बहती है ,प्रवाह है कि थमने को तैयार नहीं ,और थमना भी नहीं चाहिये क्यूंकि जीवन चलने का नाम है अंतस का यही प्रवाह तो अभिव्यक्ति का उदगम है .थमने मत दी जिए बस थामे रहिये इस उदगम को विचारों का मंथन जाने कब कोई रत्न उगल दे .विचारों कि यह नदी जाने कितने झरनों के साथ मेरे अंतर्मन में भी प्रवाहमान है जब तक है तब तक लिखना भी रोजमर्रा में शुमार है .अभिव्यक्ति का आकाश भी अनंत है इस शीर्षक चित्र कि तरह रंग है तो उगते सूरज कि लालिमा पर शब्दों के अक्षत लगाते रहिये लगाते रहिये ---------संभावनाओं के असीम आकाश पर स्वागत है आपका

सोमवार, 29 अगस्त 2011

मालवा के प्रखर पत्रकार प्रभाष जोशी पर केन्द्रित पुस्तक शब्दों के दरवेश   का विमोचन  इंदौर  प्रेस क्लब द्वारा आयोजित भाषाई पत्रकारिता महोत्सव में महामहिम उप राष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी ने किया  . कार्यक्रम में   मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह ,आलोचक 
       नामवर सिंह भी  उपस्थित थे .

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